प्रधानाचार्य संदेश क्रम

 

शिक्षा व्यवहार परिवर्तन की एक प्रक्रिया है।शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थी के मस्तिष्क में विविध प्रकार के आंकड़े और सूचनाएं भरना मात्र नहीं है वरण विद्यार्थी के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है ताकि वह स्वयं को बदलते बहतिक और सामाजिक वातावरण के अनुकूल बना सकल
ऐसे में हम शिक्षकों का यह कर्त्वय हो जाता है कि हम विद्यार्थियों के व्यवहार में वांछनीय परिवर्तन लाना सुनिश्चित करें और उनमे रचनात्मक एवं विवेचनात्मक चिंतन ,प्रयोग, सत्यापन और निष्कर्ष निष्पादन की क्षमता विकसित कर , उन्हें मानवीय ज्ञान एवं अधिगम अनुभवों से समृद्ध करें। किसी राष्ट्र का निर्माण आने वाली पीढी के व्यक्तित्व पर ही निर्भर करता है। अतः इस तथ्य में दो राय नहीं है कि शिक्षा एक राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया है।
केंद्रीय विद्यालय धार अपने उद्देश्यों की प्राप्ति एवं कर्त्तव्य निर्वाह के प्रति सजग और प्रतिबद्ध है।मुझे अपनी विद्यालय टीम का नेतृत्व करते हुएअपार हर्ष हो रहा है और हम सब स्वयं को के.वि.स. के चतुष्पद का भाग होने पर ,गौरान्वित महसूस करते हैं

 

प्राचार्य

बृजेशपाल सिंह